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रविवार, 21 फ़रवरी 2010

विवाहित पुत्रियों को मकान खाली कराने का हक नही...

माननीय उच्‍चतम न्‍यायालय ने व्‍यवस्‍था दी है कि अगर विवाहित पुत्रियॉं अपने ससुराल में सुव्‍यवस्थित तरीके से रह रही है तो उन्‍हें मायके में किराएदार से मकान खाली कराने का हक वाजिब जरूरत के आधार पर नही मिल सकता क्‍योंकि विवाहित पुत्री अपने माता-पिता पर निर्भर नही होती । माननीय न्‍यायमूर्ति मार्केन्‍डेय काटजू और माननीय न्‍यायमूर्ति तीरथ सिंह ठाकुर की खंडपीठ ने एक याचिका का निपटारा करते हुए यह फैसला सुनाया है । इसके अनुसार विवाहित और अपने पति के धर सुखपूर्वक जीवनयापन कर रही पुत्रियॉं अपने माता-पिता की तरफ से दायर मकान खाली कराने वाली याचिका की पैरवी नही कर सकती ।

पूरा प्रकरण हेतु इसे देखें

5 टिप्‍पणियां:

  1. Good information. Happy to see your blog.
    - Dr. V.N. Tripathi, Advocate, High Court , Allahabad.

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  2. Eka samayik post.aj ke samaj kee ek sateek samasya uthai hai apane.

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  3. कली बेंच देगें चमन बेंच देगें,
    धरा बेंच देगें गगन बेंच देगें,
    कलम के पुजारी अगर सो गये तो
    ये धन के पुजारी
    वतन बेंच देगें।
    हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में राज-समाज और जन की आवाज "जनोक्ति "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . नीचे लिंक दिए गये हैं . http://www.janokti.com/ , साथ हीं जनोक्ति द्वारा संचालित एग्रीगेटर " ब्लॉग समाचार " से भी अपने ब्लॉग को अवश्य जोड़ें .

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